Poetry

आयेगा एक दौर – Dawn After Dark Night

ये तिमिर घना चहुओर है फैला,हर रोज सोच से रूबरू एक चेहरा,इन शोरों में दर्प फैला है गहरा ! हर तरफ बिफरा है शोर !जो हँस रहे जितना ,उतना उनको खोने का है होड़ .. किस मकसद, किस मंजर जाये किस ओर !क्या करे जिंदगी पर अपना नहीं जोर, चुप ही रह जाते है अपनी […]

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ये रात की रेल – A Night Train

खिड़की की ओर नजर ले जाओ,धुँधली सी तस्वीर बनाओ ! देखो तुम जब नजर फिराये,हर चीज भागे बन के पराये ! रातों में फैला कल का एक शोर,पाषाण राहों में चलने का बस होड़ ! बचपन का कौतुहल मन …कहाँ से आती कहाँ को जाती रेल,आज रात की नींद चुराये, छुक छुक करती जैसे हो […]

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ये शहर !

वो कहते थे ये शहर है, ऐसा !करीब से देखिये शायद जान जायेगें ! कब तक यूँ मुसाफिर रहते !एक पराव एक आशियाँ तलाशा ! अब इस कदर बस गयी जेहन में, हर गुमनाम सी गलियाँ यहाँ की,मारे मारे फिरने में दिल्लगी सी हो गयी ! अनजाने चेहरों से हो रूबरू रोज, एकबार देखता एकटक […]