Monthly Archives: April 2012

अल्ल्हर बातें !

एक अल्ल्हर बातें है जैसे,
सपने का पलना हो जैसे !
अठखेली हवाओं जैसी !
बावरी मन चंचल हो जैसी !

आशाओं की डोरी सी !
बातें करती पहेली सी,

एक तस्वीर ….

ख्वाबो में एक तस्वीर सी बनती,
हया धड़कन के पहलु में छुपती,
झुकी नजर में शर्माती हँसती,
नाजुक मन आँखों में सिमटी !

एक ख्वाब …
कभी इन्तेजार में सज जाते पल !
बिन बुलाये सता जाते हर पल !

कल देखा था उन चेहरों में गम का जो हलचल,
शिकन भी उठते रहे इन चेहरों में भी पल पल !

ना सच है अल्ल्हर बातों का,
ना श्वेत श्याम किसी रातों का,

ना डोर है इन हवाओँ में कहीं,
जो नूतन तान से बहते है,
अलसाती सी हवाएँ बनकर,
खिडकी पर चुपके से आकर,
कभी पुरवैया से गीत सुनाकर,
बेसुध मन में जो समाकर,
सखा बन बातें करते है !

जीवनमयी गीत में एक धुन को सजाकर,
अपनों का कभी अहसास कराकर,

रिश्तों की एक डोर थमाकर ..,
कभी हम उलझे, और कभी जो सुलझे !

ये अल्ल्हर बातें .. किसकी .. शायद कोई ना समझे !

जिंदगी आखिर जिंदगी ही है..

एक संगीत कभी सुमधुर तानो भरा,
कभी अनसुना विस्मित रागों सना !

एक हँसी कभी खुशी लहरों भरा,
कभी व्यंग्य के उपहासो से जना !

एक क्रंदन कभी नयनों में भरा !
कभी रुदन आद्र मन में बना !

एक ख्वाब कभी पलकों में भरा,
कभी वह पतझर पंछी बन उड़ा !

सवाल ख़ामोशी के साया में परा,
राहों में उलझे, पग पग पर है पाषाण जड़ा !

तूफां और नाकामी, मंजिल पर खड़ा !
कब डरा, कब रुका .. ??
जिंदगी आखिर जिंदगी, तेरे संग मैं चला !

सुजीत भारद्वाज