अब तेरी मेरी बनती नही !

सुख, चैन , और छिना मेरा शहर, और कहते मेरे खुदा तुम मुझसे .. अब तेरी मेरी बनती नही ! ! (: छूटे साथी और संग, बदला बदला हर रंग, Read More …

उधर का वक्त तनहा !

ना कोई डाँटता, ना ही फ़िक्र रहती साँझ से,पहले लौट जाये घर को .. हाँ लौट आते है, घिरे घिरे से बड़े बस्ती के लोगो के बीच से.. चुप चाप Read More …