Poetry

आहट सी हुई …

स्पंदन मात्र भी नहीं था चेहरों पर, विस्मित ना हुए नयन भी थोड़े भी, बड़ी ही क्षणिक अनुभूति सी थी.. जैसे पथराये से आँखों को छु गयी, एक झलक सहलाती हुई दूर जाती ! जैसे भिगों गयी ओस की दो बूंद, धरा की कोमल घासों को चूमती हुई ! जैसे दो शब्द में छुपे थे […]

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जब उस राह से गुजरे !

जब जब उस राह से गुजरते..कुछ चुप्पी संजीदा सी उभरती थी ..मौज ठहर जाती इन चेहरों से ..वही खुशबू बिखर जाती थी आसपास ! सवाल तो अब खुद खामोश हो गए ..उसे खमोशी टूटने का इन्तेजार ही चुप करा गया ! मुह मोड़े फिर गुजरने लगे उन राहों से..जैसे हो अजनबी, गालियाँ भी अनजानी..नजरे भी […]

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नकाबपोश रातें..Midnight Solitude

नकाबपोश रातें रातों सी जिंदगी .. ना संवरती ना बिखरती ! गम था, पर दिखना था संजीदा, नकाबपोश जो भीड़ में खरे थे ! बिखेरी, थोरी सी एक बनाई हुई हँसी, जैसे आंसू सूखे रेत के चेहरों में फँसी ! मुखोटे लगाये चेहरों ने घेरा मुझे, ना राग कोई, ना द्वेष कोई … ना घृणा […]

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एक ख़ामोशी शब्दों पर फैला …

साँझ जो पसरी धुँधला सवेरा, घासों की गठरी, वो मैला कुचैला, मटमैली हाथों में एक छोटा सा थैला, लौटते खेतों से,नित की यही बेला ! बैठे ताकों में नभ भी रंगीला, बात रात से, पड़ी काली सी साया, घुप्प सी ख़ामोशी, जब शब्दों पर फैला, फिर समझा जग को, ये पथ है पथरीला ! विस्मृत […]