आहट सी हुई …

स्पंदन मात्र भी नहीं था चेहरों पर, विस्मित ना हुए नयन भी थोड़े भी, बड़ी ही क्षणिक अनुभूति सी थी.. जैसे पथराये से आँखों को छु गयी, एक झलक सहलाती Read More …

जब उस राह से गुजरे !

जब जब उस राह से गुजरते..कुछ चुप्पी संजीदा सी उभरती थी ..मौज ठहर जाती इन चेहरों से ..वही खुशबू बिखर जाती थी आसपास ! सवाल तो अब खुद खामोश हो Read More …

नकाबपोश रातें..Midnight Solitude

नकाबपोश रातें रातों सी जिंदगी .. ना संवरती ना बिखरती ! गम था, पर दिखना था संजीदा, नकाबपोश जो भीड़ में खरे थे ! बिखेरी, थोरी सी एक बनाई हुई Read More …

एक ख़ामोशी शब्दों पर फैला …

साँझ जो पसरी धुँधला सवेरा, घासों की गठरी, वो मैला कुचैला, मटमैली हाथों में एक छोटा सा थैला, लौटते खेतों से,नित की यही बेला ! बैठे ताकों में नभ भी Read More …