Poetry

शीत की रातें – Autumn Back

सीधी सपाट सड़को के किनारे, कुछ खंडर किले सा झलका, नीली रौशनी से भींगा छत उसका, कुछ बरखा ओस ले आयी, हवा सनसन ठंडक भर लायी ! हल्की भींगी ओस नहायी रातें, और हवा भी कहती ऐसी बातें, शिशिर सिरहाने कदम जो रखा, चाँद गगन में थोरा सा बहका, हाथों में हाथों को मिलाये, सखे […]

Poetry

कम नहीं !

ये सन्नाटा फिजाओं का, किसी तुफां से कम नहीं ! ये ख़ामोशी ..मेरी खता पर किसी सजा से कम नहीं .. ! धुल सरीखी राहें और रेत के फाहे.. उड़ा ले जाये ऐसे तो हम नहीं ! ये राह मेरी, चाह मेरी..फिर साथ चलने ना चलने का गम नहीं ! थोरी गुजारिश ! .. गुमराह […]

Poetry

दशहरे की शाम जो आयी ..!

दशहरे की शाम जो आयी, देखा तमस को जलते हुए, मन में उमंगो को भरते हुए.. वो बचपन … गाँव की वो सीधी सड़क, जो मेले के तरफ ले जाती थी, बच्चों की खुशियों को देखो, बांसुरी और गुब्बारे संग लौट के आती थी, चवन्नी अट्ठन्नी में बर्फ के गोले, और १ रूपये में १० […]

Poetry

ढूंढे तो चैन कहाँ की ..

बैचनी जैसे शब्द इन्तहा की, कभी बन जाते दर्द ये जुबां की .. चुप सी रहती, कमी है एक बयाँ की, बेचैन मन की चाह, ढूंढे तो चैन कहाँ की .. खफा सी सूरत, सितम है शमां की, जुदा हुई बात, असर दिखा गुमां की .. बैचनी में छुपी राह,ये बातें है उस जहाँ की, […]