शीत की रातें – Autumn Back

सीधी सपाट सड़को के किनारे, कुछ खंडर किले सा झलका, नीली रौशनी से भींगा छत उसका, कुछ बरखा ओस ले आयी, हवा सनसन ठंडक भर लायी ! हल्की भींगी ओस Read More …

कम नहीं !

ये सन्नाटा फिजाओं का, किसी तुफां से कम नहीं ! ये ख़ामोशी ..मेरी खता पर किसी सजा से कम नहीं .. ! धुल सरीखी राहें और रेत के फाहे.. उड़ा Read More …

दशहरे की शाम जो आयी ..!

दशहरे की शाम जो आयी, देखा तमस को जलते हुए, मन में उमंगो को भरते हुए.. वो बचपन … गाँव की वो सीधी सड़क, जो मेले के तरफ ले जाती Read More …

ढूंढे तो चैन कहाँ की ..

बैचनी जैसे शब्द इन्तहा की, कभी बन जाते दर्द ये जुबां की .. चुप सी रहती, कमी है एक बयाँ की, बेचैन मन की चाह, ढूंढे तो चैन कहाँ की Read More …