Poetry

मसखरे की ख़ामोशी का क्या

मेरे द्वंद से तुम सब को खामोश होते देखा, देखा मैंने शिकन की रेखाओं को उभरते.. ना जता सका देखा तुझे चुप चाप कुछ सहते हुए ! क्यों किस उम्मीद से नजरे उठाते हो मेरी तरफ, ये उम्मीद ही जो मुझे मुझसा ही नही होने देता, दिन ढले दबे पावं लौटते उस अस्ताचल में, नही […]

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बस देखो ढूंडो यही कहीं होगी गांडीव परी – India’s Independence Day

हजारे हजार अब जलने दो, साख को मशालो में भरने दो, अब लड़ना है दुह: शासन से, मद में सत्ता ने पी मदिरा, देश चलाने का बस है झगड़ा ! हमे मिली विकास दर बढते हुए, और पेट से पेट आँखे भी धँसते हुए! BPL दिखे फँसते हुए, IPL दिखा हँसते हुए, जो खेल पसीनो […]

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अर्थविहीन – Meaningless

द्वन्द क्यों उठ गया आज, जैसे अतीत खाते गोते लम्हों में, दीवार पुरानी दरारे सीलन भरी, बोझिल सा हुआ इरादा सहने का, सुनी एक आवाज खुद से उठती ! ढाई दशक मिनटों में गुजरा , जो भटका राहों से दोराहे की ओर, इंसान होने का बोझ सा हुआ, सोच ऐसी कशमकश लिए जैसे निशब्द बोध […]

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यारों बीते ना ये पल कभी !

हर मोड मे यूँ मिल जाते हो, कैसे माने चले गए थे कहीं ! ख़ामोशी का सबब ले बैठते जब हम, तो चुपके से गुन गुनाते हो कहीं ! मायूस से लगते जब कभी हम, थोड़ा गुदगुदाते हो कहीं ! कैसे सम्हले हम ठोकरों से, खुद ही राहों मे खड़े मिल जाते हो कभी ! […]

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कुछ तलाशते रहे सभी !

वो कलह की दास्तान कहते रहे ! और कोलाहल में अनसुना करते सभी ! बातें फेहरिस्त लंबी हुई इतनी, जेहन में कुछ समाते ही नही सभी ! कोई मानता ही नही कितनी बंजर है दरख्ते, पत्थरों के बीच कुछ तलाशते रहे सभी ! अभी अभी छाया जो नशा बिखरने का, रूबरू हो कर भी उसे […]