मसखरे की ख़ामोशी का क्या

मेरे द्वंद से तुम सब को खामोश होते देखा, देखा मैंने शिकन की रेखाओं को उभरते.. ना जता सका देखा तुझे चुप चाप कुछ सहते हुए ! क्यों किस उम्मीद Read More …

बस देखो ढूंडो यही कहीं होगी गांडीव परी – India’s Independence Day

हजारे हजार अब जलने दो, साख को मशालो में भरने दो, अब लड़ना है दुह: शासन से, मद में सत्ता ने पी मदिरा, देश चलाने का बस है झगड़ा ! Read More …

अर्थविहीन – Meaningless

द्वन्द क्यों उठ गया आज, जैसे अतीत खाते गोते लम्हों में, दीवार पुरानी दरारे सीलन भरी, बोझिल सा हुआ इरादा सहने का, सुनी एक आवाज खुद से उठती ! ढाई Read More …

यारों बीते ना ये पल कभी !

हर मोड मे यूँ मिल जाते हो, कैसे माने चले गए थे कहीं ! ख़ामोशी का सबब ले बैठते जब हम, तो चुपके से गुन गुनाते हो कहीं ! मायूस Read More …

कुछ तलाशते रहे सभी !

वो कलह की दास्तान कहते रहे ! और कोलाहल में अनसुना करते सभी ! बातें फेहरिस्त लंबी हुई इतनी, जेहन में कुछ समाते ही नही सभी ! कोई मानता ही Read More …