Poetry

रात के नभ चल तारों को देखा !

कई रातें लंबी बीती थी सदियों जैसी, ऐसी तंग गलियों में युग सा था चाँद को देखा, याद हमें एक आती है जब साँझ पसरते .. उमस सी सावन होती थी..सब होते थे छत पर, तब माँ चुपके से आती थी, और वो दूर हमें दिखाती थी ! सात तारों को संग लेके वो एक […]

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मेरे हमसफर

यूँ राह में, डगर में, छोड़ के चले जो हमसफर .. मगरूर बन, आवाज न देंगे, मेरे हमसफर ! गुजरे पल बीते, जैसे बीते गये हर पहर .. गुम से हुए है गलियों में, ये कैसा शहर ! उठ के फिर से लौट जाती, किनारे से हर लहर.. बेरुखी के दामन ने थामा ऐसे, की […]

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ए जिंदगी तुझे कुछ ऐसा ही समझा !

किन सपनों को तलाशे, जिसे अधखुले आँखों ने कभी आने ही ना दिया ! या जिन्हें नींद के सौतेलेपन ने, आने से पहले तोड़ दिया ! वक्त की उड़ानो ने पंख लगा दिए, और आसमां ही छीन लिया ! कभी रास्तों में उलझा, कभी मंजिलों से सहमा ! कहीं जिक्र किया ! कभी फ़िक्र क्या […]