Monthly Archives: July 2011

रात के नभ चल तारों को देखा !

कई रातें लंबी बीती थी सदियों जैसी,
ऐसी तंग गलियों में युग सा था चाँद को देखा,
याद हमें एक आती है जब साँझ पसरते ..
उमस सी सावन होती थी..सब होते थे छत पर,
तब माँ चुपके से आती थी, और वो दूर हमें दिखाती थी !
सात तारों को संग लेके वो एक तारा दिखलाती थी !
सदियाँ बीती हर बातों की ..
अब लम्हों को बस उलझते देखा !
एक रोज दूर परे, भटके से निकले..
कुछ सायों को संग चलते देखा !
उमस पर कुछ सावन भी बरसी,
साँझ को रात ओढ़ के हरषी !
तब फिर,
सदियों परे रात के नभ चल तारों को देखा ,
सात सहेली को फिर संग मिलते देखा !
Sujit

मेरे हमसफर

यूँ राह में, डगर में, छोड़ के चले जो हमसफर ..
मगरूर बन, आवाज न देंगे, मेरे हमसफर !
गुजरे पल बीते, जैसे बीते गये हर पहर ..
गुम से हुए है गलियों में, ये कैसा शहर !
उठ के फिर से लौट जाती, किनारे से हर लहर..
बेरुखी के दामन ने थामा ऐसे, की फेर ली हर नजर !
कभी जो सोचे, होगी खबर ए हमसफर ..
बीते रात में,यादों को छोड़कर, भूलेगे इस कदर !
कुछ नशा सा हुआ, बस पी गये हर जहर
चलते जा रहे मंजिल पाने हम बन के एक सिफर !
(सुजीत )
** सिफर – शून्य

Night Rider New Way 2 Go !

Calipso like Music around..
Flex of Techno might together..
My affections get flavored
Pour colors on slaty Papers..
Life makes me on go closer,
I am a Night Rider ! Night Rider !

Something to say.. Someone to say!
Frisky hood hold my way..
Sky vanishes about to Fade away
Let them go! left them go !
Night Rider New Way 2 Go !

Written: Sujit

ए जिंदगी तुझे कुछ ऐसा ही समझा !

किन सपनों को तलाशे,
जिसे अधखुले आँखों ने कभी आने ही ना दिया !
या जिन्हें नींद के सौतेलेपन ने,
आने से पहले तोड़ दिया !
वक्त की उड़ानो ने पंख लगा दिए,
और आसमां ही छीन लिया !
कभी रास्तों में उलझा,
कभी मंजिलों से सहमा !
कहीं जिक्र किया !
कभी फ़िक्र क्या !
खुद से मशरूफ हो इतना,
अब तो हर वादों से गुजरा !
चुप सा हुआ तो,
बातों में उलझा !
अकेला चला तो,
रिश्तों में उलझा !
हूँ पथिक सुनसान राहों का,
ना रुका ना थका,
ए जिंदगी तुझे कुछ ऐसा ही समझा !
Sujit Kumar