Monthly Archives: June 2011

हर सुकून तुझमें ही बसता !

गली गली भूले है कई रस्ता !
पीठ झुकी कैसा है ये बस्ता !
खाक से सपने देखते हो ,
नींद रहा अब इतना क्या सस्ता !
देख चेहरे रुखी रुखी अपनी,
फिर भी तू किस पर है हँसता !
कह कहे लगाकर चुप हो जाते,
अब ये शोर शायद नहीं जँचता !
भागे फिरते ठोकरे खाकर,
सूखे गले जब तरस जाये,
कभी देखना अपने अंदर,
हर सुकून तुझमें ही बसता !
अब भीड़ ही भीड़ दिखेगी हर तरफ,
जहाँ से तू चलेगा वही होगा तेरा रस्ता !
कभी देखना अपने अंदर,
हर सुकून तुझमें ही बसता !
– : Sujit Bharadwaj

कल रात की बारिश – A Rainy Night

A Rainy Night Poem by sujit

आज रात काली काली सी,
कुछ रंगीली सवाली सी,
अँधेरे में चुपके से बादल,
छा गए जैसे वो पागल !!
बुँदे दिखी बचपन की पहेली,
पैर पटक बच्चों सी खेली,
हाथ छुपाये, भीगे से आये,
भीगे बारिश नैन लड़ाये,
बूंदों का कुछ कल कल था,
बस यादों का एक हलचल था,
पुरबा बयार से अब कौन कहे,
अब बोलो क्यूँ तुम मौन धरे,
कुछ विकल अधजगी अधराती थी,
मन की लिप्सा पर मधु भारी थी,
क्रंदन वंदन की ये एक राती थी,
कल की बारिश यूँ प्यारी थी !!
(सुजीत भारद्वाज )

इस चक्रव्यूह में क्यों राम परे ?

यह चक्रव्यूह था जिसको ना जाना,
और राम ने शायद मन में क्या ठाना !
थे संशय में अर्जुन गांडीव धरे,
इस चक्रव्यूह में क्यों राम परे !
हर राह खरे व्यभिचारी थे,
कहीं द्रोण तो भीष्म भी भारी थे,
आशंकाओं से भरे व्यूह ने,
पांडव को भी भरमाया था ..
इस व्यूह में कूद कर आखिर,
राम ने क्यों भाग्य अजमाया था ?
कहीं धन काला, कहीं मन काला,
इस व्यूह में हर जन काला,
अब कोई तो प्रतिकार करे …
कोई चक्रव्यूह को पार करे …
आओ अभिमन्यु इस व्यूह का तुम संहार करे,
या रंग दे बसंती बन कोई न्याय पर थोड़ा वार करे !
Sujit Kumar (सुजीत भारद्वाज)