Poetry

हर सुकून तुझमें ही बसता !

गली गली भूले है कई रस्ता ! पीठ झुकी कैसा है ये बस्ता ! खाक से सपने देखते हो , नींद रहा अब इतना क्या सस्ता ! देख चेहरे रुखी रुखी अपनी, फिर भी तू किस पर है हँसता ! कह कहे लगाकर चुप हो जाते, अब ये शोर शायद नहीं जँचता ! भागे फिरते […]

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कल रात की बारिश – A Rainy Night

आज रात काली काली सी, कुछ रंगीली सवाली सी, अँधेरे में चुपके से बादल, छा गए जैसे वो पागल !! बुँदे दिखी बचपन की पहेली, पैर पटक बच्चों सी खेली, हाथ छुपाये, भीगे से आये, भीगे बारिश नैन लड़ाये, बूंदों का कुछ कल कल था, बस यादों का एक हलचल था, पुरबा बयार से अब […]

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इस चक्रव्यूह में क्यों राम परे ?

यह चक्रव्यूह था जिसको ना जाना, और राम ने शायद मन में क्या ठाना ! थे संशय में अर्जुन गांडीव धरे, इस चक्रव्यूह में क्यों राम परे ! हर राह खरे व्यभिचारी थे, कहीं द्रोण तो भीष्म भी भारी थे, आशंकाओं से भरे व्यूह ने, पांडव को भी भरमाया था .. इस व्यूह में कूद […]