Poetry

और तभी सुनामी आती है !

है दंभ अब किन बातों का ! आंखे फाड़े काली रातों का ! विकट जो चुप्पी छाती है, और तभी सुनामी आती है ! बौने से जो अब पेड़ खड़े, साधी चुप्पी से मौन धरे ! ऐसी ऊँची झपटे मन को विकल कर जाती है! और तभी सुनामी आती है ! देख अवयव अब मिश्रण […]

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उलझा दिया आज फिर सवालों ने !

परतों में रखा था छुपा के हमने खमोशी !खोल दी जो थोरी सी हवा उठी किसी ओर से ! थोरी दूर जा के अहसास सा होने लगा !अब कोई लौटने वाला नही इन राहों से ! मेरी बातों की गुजारिश ऐसी हुई खाली !जैसे कोई ख्वाब जला गया हो सीने से ! देखे न दिखे […]

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अब कौन डगर मुझे चैन मिले !

अब कौन डगर मुझे चैन मिले ! किस पथ जाऊ बस रैन मिले ! सूखे रूखे पतझर से, झुकते थकते डाली पर , अब खुशियों की कोई कुसुम खिले ! अब कौन डगर मुझे चैन मिले ! कोई सखा सवेरे होता था, निश्चल मन कुछ कह लेता था, अब खमोशी की साजिश से, किसी धीमे […]