उलझा दिया आज फिर सवालों ने !

परतों में रखा था छुपा के हमने खमोशी !खोल दी जो थोरी सी हवा उठी किसी ओर से ! थोरी दूर जा के अहसास सा होने लगा !अब कोई लौटने Read More …

अब कौन डगर मुझे चैन मिले !

अब कौन डगर मुझे चैन मिले ! किस पथ जाऊ बस रैन मिले ! सूखे रूखे पतझर से, झुकते थकते डाली पर , अब खुशियों की कोई कुसुम खिले ! Read More …