Monthly Archives: February 2011

थोड़ी फुरसत दे ए जिंदगी ..City Life

थोड़ी फुरसत दे ए जिंदगी ..
कहीं तो जाके ढूंड लाऊ खुद को,
खुद अपने से सिसकता वक्त की टिक टिक सोने नही देती,
ये मुखोटे लगाये इंसानों के शोर अब जीने नही देती !
नही देखा पता इन अंधेरो के चीरते प्रकश स्तंभों को ,
पराये से आंखे दिखाते है ये हमारी आँखों में घूर के !
किन चौराहों पर रुकते, की लोग आते है यहाँ,
सुना है लोग ऑनलाइन, जिंदगी ऑफलाइन हो गयी !
जब भी भाग के जाते कई हाथ बढ़ते थे आगे,
पर मेट्रो सवार जिंदगी अब मन के अंदर से गुजर गयी !
कैसे बचोगे इस मौसमी तुफानो से …
रुखाई के तूफान अक्सर उठते है इन शहरों में !
रचना : सुजीत कुमार लक्की

क्या है !

देखा हर नब्ज जिंदगी का ..
पूछ बैठा इरादा क्या है !
जब समझ बैठा कोई परछाई ..
तब देखा मेरा साया क्या है !
रह रह झलक जाता जब कोई ..
देखे न दिखा नजारा क्या है !
खामोश दीखते हर राहों पर जब ..
फिर पूछते तेरा वादा क्या है !
मुस्कुराहटो को छिपा रखा सिरहाने ..
तो समझा तेरा बहाना क्या है !
फासले बढे तो बढे चुप थे ..
रो परे जब पूछा ठिकाना क्या है !
रचना : सुजीत कुमार लक्की

Sujit Random Thoughts

Sujit Random Thoughts

Sujit :23-Dec-09 “शत्रु मेरा बन गया है छल रहित व्यवहार मेरा !”
Sujit :1-jan-10 “सफ़र शुरू है , मायूसी अब तेरा काम नहीं, हम तो चलेगे ही भले न हो किसी का साथ कहीं!”
Sujit :24-jan-10 Become a seeker,knock and the door will open.Never stop learning !
Sujit :14-Feb-10 Listening” संग प्यार रहे ! मैं रहूँ ना रहू .. सजदा तेरा सजदा ! ! ”
Sujit :28-Feb-10 I Am Not Here Just To Make A Living..I Am Here To Make A Life !
Sujit :27-Mar-10 Listening “नैना तेरे कजरारे है ! ! नैनो पे हम दिल हारे है … ! ! ”
Sujit :9-Apr-10 “एक प्रगतिशाल चिंतन के लिए जरुरी है – विरोध ! !”
Sujit :6-Jul-10 “जब भी अपनापन ढूंढा ! ! सब रिश्तों के चोर दिखे… ! !”
Sujit :18-Jul-10 “रुकने की गुजारिश नही .. बस वापस आने की खाव्हिश है … ! !”
Sujit :18-Sep-10 You Do Your Best And God Will Do Rest ! (My Friend Says..)
Sujit :10-Oct-10 “वक्त की चाल ऐसी हुई; हर नकाब पर एक चेहरा बन बैठा ” ! !
Sujit :24-NOV-10 “हमारी ख्वाहिश थी मुस्कुराने की ..हर मोड़ पर एक बहाने मिलते चले गये !”
Sujit :20-DEC-10 उलझनों को पाँव लग आये है ,आजकल साथ साथ चलते देखा है उन्हें ! !
Sujit :16-JAN-11 सितम के चेहरे यहाँ वहाँ बिखरे परे थे . बस अपनी खता की तलाश थी ! !
Sujit :26-JUN-11 इबादत कम .. इच्छाओं से भरा इंसान हूँ मैं ! बदी से सना .. सजदे में दिखता मेहमान हूँ मैं !