Monthly Archives: October 2010

पिया तोरा कैसा अभिमान ..! ! @ Raincoat Movie

RainCoat – एक हिंदी चलचित्र ..जो दिल को छु जाती ..

(एक ऐसी कहानी रिश्तों की , नारी जीवन की सच्चाई या एक बलिदान की , प्यार की …
या आपके जिंदगी के पत्रों को जीवंत करती कहानी के कुछ पल … आप भी देखे ! ! )

[ “RITUPARNO GHOSH’S RAINCOATappears to tell a story that could be detailed on the back of a bus ticket. Mannu (Ajay Devgan) comes to Kolkata, meets ex-girlfriend-and-now-married Neeru (Aishwarya Rai), and talks to her until the film ends (with a heartbreaking twist characteristic. ” ]

किसी मौसम का झोंका था ..

जो इस दीवार पर लटकी हुई तस्वीर तिरछी कर गया है ..
गये सावन में ये दीवारें यूँ सिली नही थी ,
नजाने इस दफा क्यूँ इनमे सीलन आ गयी है , दरारे पर गयी है i,
और सीलन इस तरह बहती है जैसे खुश्क रुकशारो पर गिले आंसू चलते है ..


ये बारिश गुनगुनाती थी , इसी छत की मुंडेरो पर..
ये घर की खिर्कियों के कांच पर ऊँगली से लिख जाती थी संदेशे ,
पर बिलखती रहती है बैठी हुई , अब बंद रोशन दानो के पीछे ..

दुपहरे ऐसी लगती है , बिना मोहरों के खली खाने रखे है ,
न कोई खेलने वाला है बाजी , और न कोई चल चलता है .

न कोई खेलने वाला है बाजी , और न कोई चल चलता है ..
न दिन होता , न रात होती , सभी कुछ रुक गया है ..
वो क्या मौसम का झोंका था ,
जो इस दीवार पर लटकी हुई तस्वीर तिरछी कर गया …

प्रेषित : सुजीत कुमार लक्की


अंत : ये प्रतिशोध था या प्रयाशचित ?

कभी हँसे जो मेरी हसरतों पर – Sachin Legend of India

कभी हँसे जो मेरी हसरतों पर ..
हमने उन्हें भी सलाम किया …
सब लोग कहते है मुझे खुदा सा , पर मेरी ये खता नही मेरे रब ..
तेरी ओर ये नजर रखी, और बस मैंने तो सपनो को अंजाम दिया ! !
रचना : सुजीत कुमार लक्की

यारों कभी तो अकेला छोड़ो -Treasured and Cherished

यारों कभी तो अकेला छोड़ो,
थोड़ा हम भी रो ले कभी …

हर मोड मे यूँ मिल जाते हो ,
कैसे माने चले गए थे कहीं .

ख़ामोशी का सबब ले बैठते जब हम..
तो चुपके से गुन गुनाते हो कहीं ..

मायूस से लगते जब कभी हम,
थोड़ा गुदगुदाते हो कहीं ..

कैसे सम्हले हम ठोकरों से ,
खुद ही राहों मे खड़े मिलते हो कहीं ..

शायद मान बैठे गैर सभी ,
अपने का अहसास दिलाते हो कभी ..

अब तक कैसे समझे चले गए !

यारों कभी तो अकेला छोड़ो,
थोड़ा हम भी रो ले कभी …
रचना : सुजीत कुमार लक्की