Poetry

जीने के बदले है ढंग – A Social Media Life !

जीने का कुछ ढंग बदला, हमने भी अपना रंग बदला.. छत पर एंटीना की जगह , अब डिश टीवी ने ले ली.. कपड़े मे T-shirt का चलन बढ़ गया.. पर ‘T-shirt’ का ‘T’ कुछ ज्यदा ही लंबा हो गया.. मिलते जुलते अब थक गए है हम, और ‘Facebbok’ पर बस रह गए है हम .. […]

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सब बिखरा सा ..More Than A Poem

सब बिखरा सा .. क्या क्या समेटू इन दो हाथों मे ? वो परेशां थे.. पर उनकी बड़ी ही चाहत थी,हमे आजमाने की ! खामोश हूँ खरा .. देख रहा लहरों के उछालों को ! अपने हाथों को दूर ही रखो .. ठोकरों से गिर कर खुद ही उठूँगा मैं , और तब देखेगा ये […]

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एक नाव चलाये कागज़ का ही सही ! – A Rainy Thoughts

ऑफिस के खिड़कियों से यूँ ही बाहर होते झमाझम बारिश को देखर मना झूम उठा और कुछ बचपन की यादें ठहर सी गयी …मन में सावन लाने को आतुर बरस रही बुँदे एक दूसरे पर .. चलो आज फिर मिलके एक नाव चलाये कागज़ का ही सही ! रचना : सुजीत कुमार लक्की