Poetry

शब्दो के दरमियाँ फासले बहुत थे – A Random Thoughts

शब्दो के दरमियाँ फासले बहुत थे ,पर कुछ बातें तो निकली जुबान से ! अनसुनी न थी बातें मेरी ,मगर गुस्ताख़ी का नाम दे गये ! यूँ तो फिदरत ही नही समझाने की,कहते कहते बस एक अंजाम दे गए ! रचना : सुजीत कुमार लक्की

Poetry

होली – इन आँखों में जो रंग है – My Holi 2010

होली रंगों के त्यौहार पर – अपने घर से दूर मेरे मन ने रंगा दिया कई रंगों में .. हम रंगों से दूर उमंगो से दूर ! ! वो क्या था होली का सुरूर ! ! थी ध्माचौकरी घट घट पर , थे सने रंग गुलाल हर अम्बर पर ! ! नाच उठे बच्चे, बूढ़े […]