Monthly Archives: March 2010

शब्दो के दरमियाँ फासले बहुत थे – A Random Thoughts

शब्दो के दरमियाँ फासले बहुत थे ,
पर कुछ बातें तो निकली जुबान से !

अनसुनी न थी बातें मेरी ,
मगर गुस्ताख़ी का नाम दे गये !

यूँ तो फिदरत ही नही समझाने की,
कहते कहते बस एक अंजाम दे गए !


रचना
:
सुजीत कुमार लक्की



होली – इन आँखों में जो रंग है – My Holi 2010


होली रंगों के त्यौहार पर –

अपने घर से दूर मेरे मन ने रंगा दिया कई रंगों में ..

हम रंगों से दूर उमंगो से दूर ! !

वो क्या था होली का सुरूर ! !
थी ध्माचौकरी घट घट पर ,
थे सने रंग गुलाल हर अम्बर पर ! !
नाच उठे बच्चे, बूढ़े और जवान ,
जो गी रा सा रा ने जब छेरा गान ! !
इस होली पर उस होली की ,
यादें जो मेरी रंगी रहीं ! !
इन आँखों में जो रंग है ,
चलो वो होली का ही सही ! !

रचना : सुजीत कुमार लक्की