Poetry

गणतंत्र दिवस – मैंने भी शांति नहीं मानी है …

महगाई पर माथे की शिकन !हिंसा से विचलित मन,गणतंत्र पर जन गण मन !हर बुराई के खिलाफ एक रण ,मैंने भी शांति नहीं मानी है … गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ जय हिंद ! रचना : सुजीत कुमार लक्की

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जब सर्द की रातें है आती !

आहिस्ता आहिस्ता आगोश में आती ,थोरी कपकपाती हाथों को सहलाती , ठिठुरती सिहरती ये बातें कह जाती , जब उनकी हँसी मन ही मन गुदगुदाती ,ओस की बूँदें मन को है भरमाती ,जब सूरज आँख मिचोली करके है जाती , कहीं अलाव पर जब बातें है छिड जाती,और दूर कहीं कोई धुन है गुनगुनाती ,जब […]