Monthly Archives: January 2010

गणतंत्र दिवस – मैंने भी शांति नहीं मानी है …

महगाई पर माथे की शिकन !
हिंसा से विचलित मन,
गणतंत्र पर जन गण मन !
हर बुराई के खिलाफ एक रण ,
मैंने भी शांति नहीं मानी है …

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ जय हिंद !

रचना : सुजीत कुमार लक्की

जब सर्द की रातें है आती !


आहिस्ता आहिस्ता आगोश में आती ,
थोरी कपकपाती हाथों को सहलाती ,
ठिठुरती सिहरती ये बातें कह जाती ,

जब उनकी हँसी मन ही मन गुदगुदाती ,
ओस की बूँदें मन को है भरमाती ,
जब सूरज आँख मिचोली करके है जाती ,

कहीं अलाव पर जब बातें है छि जाती,
और दूर कहीं कोई धुन है गुनगुनाती ,
जब सर्द की रातें है आती !

रचना : सुजीत कुमार लक्की