Monthly Archives: December 2009

एक नये वर्ष को आना है !

एक नये वर्ष को आना है ,
बस खुशियों में खो जाना है !

बीते हुए वर्ष से …

कुछ यादें देकर चली गयी ,
कुछ वादों से वो मुकर गयी ,
किस रस्ते लेकर चली गयी,
अब उसको क्या समझाना है,
एक नये वर्ष को आना है !

कब गुजर गया ये वर्ष

कब क्या सोचा समझा पता नहीं ,
आँखें भी तर थी, पता नही ,
कोई चला गया कुछ खबर नहीं ,
हम भी चलते रहे, पर डगर
नहीं !

अब तो बस अपनी ही बारी है ,
एक
नये की वर्ष की तैयारी है !


रचना : सुजीत कुमार लक्की (आप सभी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ )


शाम का ढलता सूरज

रोज ख़त्म होता एक और दिन …
एक शाम होती…
शाम का ढलता सूरज…
और क्या सोचते आप और हम …
परिदृश्य . . .

शाम का डूबता सूरज , जैसे रात को आवाज लगा रही हो !
उदेव्लित सा मन , जैसे कुछ तलाशता थका सा हो रहा !

परिस्थिति . . . .

हम भी शामिल हो जाये, उस कारवां में जो सुकून तलाशने जा रही,
जैसे दिन की बेजान नैनो को, रात एक शीतलता देने जा रही हो ,

पथिक . .
कुछ जा रहे जहाँ, एक ममता की फुहार का इन्तेजार है,
या खुशिया छलकाती, अपनों के प्यार का ऐतबार है,
या किसी आंसू को, आज रात की मादकता का इंकार ,

पराकाष्ठा . . .

पर में क्यों बन रहा , इस कारवां का पंछी,
जिसे न तलाश , जिसे न प्यास ,
बस है तो बस इस ढलते सूरज का अहसास ! ! !

रचना : सुजीत कुमार लक्की (कुछ पंक्ति बद्ध नहीं है रचना बस भावो को चुन लीजये ! !)