Poetry

एक नये वर्ष को आना है !

एक नये वर्ष को आना है ,बस खुशियों में खो जाना है ! बीते हुए वर्ष से … कुछ यादें देकर चली गयी ,कुछ वादों से वो मुकर गयी ,किस रस्ते लेकर चली गयी,अब उसको क्या समझाना है,एक नये वर्ष को आना है ! कब गुजर गया ये वर्ष… कब क्या सोचा समझा पता नहीं […]

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शाम का ढलता सूरज

रोज ख़त्म होता एक और दिन … एक शाम होती… शाम का ढलता सूरज… और क्या सोचते आप और हम … परिदृश्य . . . शाम का डूबता सूरज , जैसे रात को आवाज लगा रही हो ! उदेव्लित सा मन , जैसे कुछ तलाशता थका सा हो रहा ! परिस्थिति . . . . […]