Monthly Archives: August 2009

अभी कुछ बाकी है

poem of due lifeरास्ते भले ही बदले हमने पर हम भी किसी मंजिल के राही है ,
उबर खाबर पगडंडियो पर जरुर फिसले हमारे पावं
पर चलने की ललक आज भी बाकी है !


वक़्त की भागदौर में रुकता गया कारवां
पर सपनो की भवर से निकलना आज भी बाकी है !
रुकी थकी यादों में डूबा जरुर में पर उन पर
लहरों का उठाना आज भी बाकी है !

थके थके से हो कदम मेरे लगते
पर मन में कसक अभी बाकी हैबाकी है ! ! !

रचना : सुजीत कुमार लक्की

एक अनजान सफ़र


भागती ऊहापोह जिन्दगी में
क्या खोने पाने की चाहत है,

बस उबते थकते मन को बहलाते

चले जा रहे एक अनजान सफ़र पर !

क्या पाउगा या क्या खो दूगा,
गुमनाम चाहत है एक हसरत है,
सपनो की बादल की एक बूंद ही सही
बस चले जा रहे एक अंजन सफ़र पर


रचना : सुजीत कुमार लक्की


Indian Independence Day Quotes: Spirit of 15th August

शहीदो की मजारो पर लगेगे हर वर्ष ये मेले
वतन पर मरने वाले का आखिर यही निशा होगा!

मुझे तोर लेना वनमाली उस पथ पर तुम देना फेक
मातृभूमि
पर शीश चराहने जिस पथ जाये वीर अनेक !

जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है
वो नर नही पशु ही निरा अरु मृतक समान है !

पत्थर की मुरतो में समझा था तू खुदा है
खाके वतन का हर जर्रा जर्रा देवता है !

जो भरा नही है भावो से जिसमे बहती रसधार नही
वो
हृदय नही वो पत्थर है जिसमे स्वदेश का प्यार नही !

लड़ैगै आखिरी दम तक जब तक है दम में दम
वतन वास्ते बन्दे सजाये मौत भी है कम

संकलित ऍवं प्रेषित : सुजीत कुमार लक्कीं