Poetry

एक नये वर्ष को आना है !

एक नये वर्ष को आना है ,बस खुशियों में खो जाना है ! बीते हुए वर्ष से … कुछ यादें देकर चली गयी ,कुछ वादों से वो मुकर गयी ,किस रस्ते लेकर चली गयी,अब उसको क्या समझाना है,एक नये वर्ष को आना है ! कब गुजर गया ये वर्ष… कब क्या सोचा समझा पता नहीं […]

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शाम का ढलता सूरज

रोज ख़त्म होता एक और दिन … एक शाम होती… शाम का ढलता सूरज… और क्या सोचते आप और हम … परिदृश्य . . . शाम का डूबता सूरज , जैसे रात को आवाज लगा रही हो ! उदेव्लित सा मन , जैसे कुछ तलाशता थका सा हो रहा ! परिस्थिति . . . . […]

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वो चले गए – wo Chale gaye

वो चले गए ,थोड़ा मुस्कुरा के गए,हमे तो रुला के गए ! हम भी मगरूर पूछ ही लिया ,कब आओगे लौट के,वो बस अपना सर झुका के गए ! सोचा कुछ तस्वीरे थी किताबो पर ,पर देखा था वो उनको भी मिटा के गए ! कहा मैंने भी ,निकल जा मन तू भी राह अपनी […]

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एक क्रिकेट मैच की वेदना

छुपते नही आंसू आब इन चेहरों में , इसे निकलने का एक जरिया दे दे ! बहुत मायूस इस भीड़ में हम, बस रोने का एक कंधा दे दे ! बहुत लड़ चूका अपनी कीस्मत से …. ए मेरे खुदा तू मुझे कब तक आज्म्येगा ….. एक रोज की साम ही थी ये क्रिकेट मैच […]

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एक गुड़िया परायी होती है

आज भी हमारे देश में लड़कियो की उपेछा की दृष्टि से देखा जाता है.. उनको पराया समझा जाता है , समाज आज भी अपने पुराने रीती रिवाजो में उलझा हुआ है.वो हमारे हर रिश्तों में चाहे एक माँ हो या , बहन ,संगिनी या दोस्त हर रिश्तों में स्नेह बरसाती है, जीवन के किसी रंगों […]

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जब कभी दीवाली आती थी

तन कलरव मन हिषॅत होता था ,जब कभी दीवाली आती थी . दौर दौर के छत के मुंडेरों पर,दीप जलाना फूल सजाना हमे तो ,बहुत ये भाती थी ,जब कभी दीवाली आती थी . पटाखों फुल्झारियो की लंबी लिस्ट ,मेरे गुल्लक से बहुत भारी थी ,बस यही सोच क्रर रह जाते थे,रोकेट और अनार की […]